Thursday, May 28, 2020

Introduction to SCR | Power Diodes

SCR क्या है :-
thyristor को SCR (silicon controlled rectifier) भी कहा जाता है. यह एक बहुपरत अर्धचालक युक्ति है. इसमें चार परत p और n प्रकार के पदार्थों की होती है जो कि एक के बाद एक लगे रहते हैं. इसमें तीन pn जंक्शन होते हैं.
thyristor में तीन टर्मिनल होते हैं anode, cathode और gate. gate जो है वह cathode के पास वाले p प्रकार के क्षेत्र से जुड़ा रहता है.
डायोड की तरह ही thyristor भी unidirectional युक्ति है और एक ही दिशा में धारा प्रवाहित होने देता है. इसका उपयोग amplification में नहीं किया जा सकता है.
यह एक bistable switch की तरह कार्य करता है.

working of SCR (thyristor) 

एक SCR की कार्यविधि में इसकी कुछ अवस्थाएं होती हैं-
Reverse blocking- इस अवस्था में thyristor एक रिवर्स बायस डायोड की तरह धारा का अवरोध करता है. इस अवस्था में यह सिर्फ एक दिशा में चालन करता है और विपरीत दिशा में अवरोध करता है.
forward blocking- इस अवस्था में thyristor इस प्रकार कार्य करता है कि ये forward धारा को अवरोध करता है. सामान्य डायोड इस तरह की धारा को प्रवाहित होने देता है परन्तु thyristor इसको अवरोधित कर देता है. इस अवस्था में SCR “turn ON” अवस्था में नहीं होता है.
forward conducting- इस अवस्था में thyristor चालन करने लगता है क्योंकि gate पर धारा लागु कर दी जाती है. इस अवस्था में यह चालन करते रहता है चाहे gate पर कोई भी अवस्था हो. thyristor को उत्तेजित करने के लिए ही gate पर धारा लागू की जाती है. यह चालन करना तब बंद करता है जब forward धारा होल्डिंग धारा से कम हो जाती है.

two transistor analogy of thyristor

thyristor में चार अर्धचालक क्षेत्र होते हैं. P,N,P,N. इसको हम दो आपस में जुड़े हुए ट्रांजिस्टर की तरह मान सकते हैं. जिसमे एक pnp transistor(Q1) और एक npn transistor(Q2) होता है. Q1 का emitter SCR के anode टर्मिनल की तरह कार्य करता है और Q2 का emitter SCR के cathode की तरह कार्य करता है. Q1 का base Q2 के कलेक्टर से जुड़ा रहता है. और Q1 का कलेक्टर Q2 के base से जुड़ा रहता है. SCR का gate टर्मिनल Q2 के base से जुड़ा रहता है.

Applications of SCR in Hindi (अनुप्रयोग)

  1. इसका प्रयोग power switching circuit में होता है.
  2. जीरो वोल्टेज switching circuit में भी इसका प्रयोग किया जाता है.
  3. controlled rectifier में इसका उपयोग किया जाता है.
  4. इसका use इन्वर्टर में भी किया जाता है.
  5. AC और DC की गति नियंत्रण में SCR का उपयोग किया जाता है.
  6. light dimmers में भी SCR का प्रयोग किया जाता है.

Power Diodes

डायोड केवल दो परतों, दो टर्मिनलों और एक जंक्शन वाले सबसे सरल अर्धचालक उपकरण हैं। साधारण सिग्नल डायोड में पी टाइप सेमीकंडक्टर और एन टाइप सेमीकंडक्टर द्वारा गठित जंक्शन होता है, लीड जॉइंट पी टाइप को एनोड कहा जाता है और दूसरी साइड लीड को एन टाइप से जोड़ने को कैथोड कहा जाता है। नीचे दिया गया चित्र एक साधारण डायोड और उसके प्रतीक की संरचना को दर्शाता है।
पावर डायोड भी सिग्नल डायोड के समान होते हैं लेकिन इसके निर्माण में थोड़ा अंतर होता है।

सिग्नल डायोड में P और N दोनों पक्षों का डोपिंग स्तर समान होता है और इसलिए हमें एक PN जंक्शन मिलता है, लेकिन पावर डायोड में हमारे पास एक भारी doped P + के बीच एक जंक्शन बनता है और एक हल्का doped N– लेयर होता है जो एपिटैक्सियलली एक भारी पर विकसित होता है। doped N + परत। इसलिए संरचना नीचे की आकृति में दिखाई गई है।

V-I Charecteristics of Power Diodes

forward biased के लिए सिग्नल डायोड में, वर्तमान में तेजी से वृद्धि होती है, हालांकि पावर डायोड में उच्च आगे की ओर उच्च ओमिक ड्रॉप होता है, जो घातीय वृद्धि पर हावी होता है और वक्र लगभग रैखिक रूप से बढ़ता है। अधिकतम रिवर्स वोल्टेज जो डायोड का सामना कर सकता है, उसे वीआरआरएम, यानी पीक रिवर्स रिपिटिटिव वोल्टेज द्वारा दर्शाया गया है। इस वोल्टेज के ऊपर रिवर्स करंट बहुत अधिक अचानक हो जाता है और चूंकि डायोड को इतनी अधिक मात्रा में गर्मी को नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए यह नष्ट हो सकता है। इस वोल्टेज को पीक इनवर्स वोल्टेज (PIV) भी कहा जा सकता है। 

  

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